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खामेनेई का निधन: ईरान को विनाशकारी झटका, अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत का चौंकाने वाला सच

छवि स्रोत: एपी/फ़ाइल
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई

खामेनेई का निधन एक ऐसी ऐतिहासिक और विनाशकारी घटना है जिसने रातों-रात मध्य पूर्व (Middle East) की भू-राजनीति को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान (US-Israeli Operation) में मौत हो गई है। शुरुआत में इस खबर को लेकर संशय था, लेकिन अब खुद ईरानी मीडिया और राज्य टेलीविजन ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि 86 वर्षीय खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं।

खामेनेई का निधन: ईरानी मीडिया ने की आधिकारिक पुष्टि

जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह चौंकाने वाला दावा किया, तो कई लोगों को यह महज एक कूटनीतिक दबाव या अफवाह का हिस्सा लगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद, ईरान के आधिकारिक टीवी और समाचार एजेंसियों (IRNA) ने भारी मन से इस खबर पर मुहर लगा दी।

ईरानी मीडिया ने एक भावुक संदेश जारी करते हुए कहा, “देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई है।” इसके साथ ही उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक कड़ा संदेश भी प्रसारित किया: “मरने से पहले कृपया अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को बताएं कि हमने वह दौर देखा था जब 86 साल के मुजाहिद ने अकेले इस्लाम की लड़ाई लड़ी थी, जबकि पूरी दुनिया और इस्लामिक देश खामोशी और उदासीनता की नींद में डूबे हुए थे। अल्लाह इस महान व्यक्ति की रक्षा करे और उसे जीत प्रदान करे।”

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ट्रम्प का चौंकाने वाला बयान और खामेनेई का निधन

इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल (Truth Social) अकाउंट पर यह घोषणा की। उन्होंने इस ऑपरेशन को एक बड़ी सफलता करार देते हुए इसे ईरानी लोगों के लिए अपना देश “वापस लेने” का सबसे बड़ा मौका बताया।

ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट है कि यह संयुक्त हमला बेहद सुनियोजित था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और इजरायली सेना ने मिलकर इस ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ (Decapitation Strike) को अंजाम दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरानी नेतृत्व को खत्म करना और उनके सैन्य ढांचे को पंगु बनाना था।

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खामेनेई का निधन के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक

ईरान के भीतर इस घटना का असर बेहद गहरा है। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के बाद सत्ता संभालने वाले खामेनेई, देश के सभी बड़े राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक फैसलों के अंतिम अधिकारी थे। उनकी मौत के बाद देश में एक बड़ा नेतृत्व शून्य (Leadership vacuum) पैदा हो गया है, क्योंकि उनके उत्तराधिकारी को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं है।

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इस अभूतपूर्व संकट की घड़ी में, ईरानी सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक: पूरे देश में 40 दिनों के लिए सार्वजनिक शोक (Public Mourning) की घोषणा की गई है।

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  • सार्वजनिक अवकाश: देशवासियों के लिए सात दिनों के आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया गया है, ताकि लोग सड़कों पर उतरकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर सकें।

बेटी, पोते और दामाद की भी मौत; खामेनेई का निधन लाया तबाही

इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के खात्मे तक सीमित नहीं था। ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों के अनुसार, इस भीषण बमबारी में सिर्फ खामेनेई की जान नहीं गई, बल्कि उनके परिवार के कई अहम सदस्य भी मारे गए हैं।

रिपोर्टों में पुष्टि की गई है कि उनकी बेटी, पोते और दामाद की भी इस हमले में मृत्यु हो गई है। इसके अलावा, ईरान के रक्षा मंत्री और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के भी इस ऑपरेशन में मारे जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

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आगे क्या? मध्य पूर्व में बढ़ते पूर्ण युद्ध के बादल

खामेनेई का निधन सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका और इजरायल से बदला लेने की कसम खाई है और इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों व इजरायली शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले शुरू हो गए हैं। वैश्विक विमानन कंपनियों ने मध्य पूर्व के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं, और खाड़ी देशों ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिए हैं। दुनिया अब सांस रोके इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है।

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