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जन नायकन निर्णय की व्याख्या | सेंसर बोर्ड ने लगाई फटकार, विजय को मिली राहत; जानिए ‘जन नायक’ पर कोर्ट के आखिरी फैसले की 5 अहम बातें

जना नायगन इस वक्त भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्म बनी हुई है। यह सुपरस्टार थलापति विजय के करियर की सबसे अहम फिल्मों में से एक मानी जाती है। ‘जन नायक’ एक पॉलिटिकल एक्शन-थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है जो भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ खड़ा है। फिल्म में थलपति विजय को जनता के मसीहा (नायक) के रूप में दिखाया गया है, जो राजनीतिक व्यवस्था में सुधार करने की कोशिश करता है। जन नायकन सेंसर सर्टिफिकेट विवाद में अब आखिरी फैसला आ गया है. थलपति विजय अभिनीत यह फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी प्रमाणपत्र नहीं मिलने के बाद इसे रोक दिया गया था। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने सीबीएफसी प्रमाणपत्र जारी करने में देरी का हवाला देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। इस मामले में अब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है.

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थलपति विजय का किरदार

चूंकि विजय ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कज़गम’ (टीवीके) लॉन्च की है, इसलिए इस फिल्म को उनके राजनीतिक करियर के लिए ‘लॉन्चपैड’ के रूप में देखा जा रहा है। फिल्म में उनके संवाद सीधे तौर पर वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हैं।

जना नायगन: अदालत ने क्या फैसला किया?

मद्रास उच्च न्यायालय ने जन नायकन के निर्माताओं द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और सीबीएफसी को तुरंत ‘यूए’ प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने सीबीएफसी अध्यक्ष द्वारा जारी पत्र को रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को समीक्षा समिति को भेजा गया था, और कहा कि आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना था।

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इसका मतलब है कि अब जना नायगन के निर्माता किसी भी समय फिल्म की नई रिलीज डेट की घोषणा कर सकते हैं।

जना नायगन: अदालत ने अपने फैसले को कैसे समझाया

लाइव लॉ के मुताबिक, फैसला सुनाते हुए जस्टिस पीटी आशा ने कहा, “सामग्री की जांच के बाद, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता की शिकायत बाद में की गई शिकायत प्रतीत होती है।” कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी शिकायतों पर ध्यान देने से खतरनाक प्रवृत्ति शुरू हो जाएगी.

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अदालत ने पाया कि 6 जनवरी को अपलोड किया गया चेयरपर्सन का पत्र अधिकार क्षेत्र से बाहर था। कोर्ट ने कहा कि एक बार समिति द्वारा सुझाए गए बदलाव कर दिए जाएं तो सर्टिफिकेट अपने आप मिल जाएगा.

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आदेश में आगे कहा गया कि अध्यक्ष द्वारा शक्ति का प्रयोग अधिकार क्षेत्र के बिना था, क्योंकि समिति द्वारा सूचित किए जाने के बाद कि कुछ कटौती के साथ यूए प्रमाणपत्र दिया जाएगा, अध्यक्ष ने पहले ही फिल्म को समीक्षा के लिए भेजने का अधिकार छोड़ दिया था।

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चूँकि आदेश क्षेत्राधिकार के बिना था, न्यायालय ने माना कि वह राहत को संशोधित करने के लिए अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग कर सकता है। नतीजतन, समीक्षा समिति को फिल्म भेजने का पत्र रद्द कर दिया गया और सीबीएफसी को तुरंत प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया। याचिका स्वीकार कर ली गई, और न्यायालय ने आदेश दिया कि “यूए” प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जाए।

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