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सिनेमाई इतिहास का सबसे बड़ा ‘महा-मिलन’: कमल, रजनी एकजुट

47 साल बाद बड़े पर्दे पर एक साथ लौट रहे हैं रजनीकांत और कमल हासन

रजनीकांत और कमल हासन. फ़ाइल | फोटो साभार: द हिंदू

47 साल बाद बड़े पर्दे पर एक साथ लौट रहे हैं रजनीकांत और कमल हासन; प्रशंसकों की प्रतिद्वंद्विता से परे, एक ऐसी दोस्ती जो कायम है

चेन्नई:

रजनीकांत और कमल हासन एकजुट: तमिलनाडु की राजनीति, संस्कृति और समाज हमेशा से ‘दो ध्रुवों’ (Duopoly) के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। चाहे वह राजनीति में डीएमके (DMK) बनाम एआईएडीएमके (AIADMK) हो, संगीत में इलैयाराजा बनाम ए.आर. रहमान, या सिनेमा में रजनीकांत बनाम कमल हासन। यह केवल एक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि एक सामाजिक संरचना है जिसने दशकों से प्रशंसकों को दो खेमों में विभाजित रखा है। लेकिन अब, दक्षिण भारतीय सिनेमा (कॉलीवुड) में एक ऐसा भूकंप आने वाला है जिसकी गूँज पूरी दुनिया में सुनाई देगी।

निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार ने वह कर दिखाया है जिसका इंतजार भारतीय सिनेमा के प्रशंसक पिछले चार दशकों से अधिक समय से कर रहे थे—सुपरस्टार रजनीकांत और ‘उलगनायगन’ कमल हासन का एक साथ पर्दे पर पुनर्मिलन।

47 साल का लंबा इंतजार: 1979 से 2026 तक का सफर

यह दोनों दिग्गज अभिनेता पूरे 47 साल बाद एक फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में साथ नजर आएंगे। आखिरी बार इन्हें 1979 की ब्लॉकबस्टर ‘निनैथले इनिक्कम’ में साथ देखा गया था, जिसका निर्देशन उनके गुरु के. बालाचंदर ने किया था। हालांकि, इसके बाद 1981 में कमल ने रजनी की फिल्म ‘थिल्लू मुल्लू’ में एक कैमियो किया था और 1985 की हिंदी फिल्म ‘गिरफ्तार’ में वे अमिताभ बच्चन के साथ नजर आए थे, लेकिन एक संपूर्ण ‘को-स्टार’ के रूप में ‘निनैथले इनिक्कम’ ही उनकी आखिरी बड़ी फिल्म थी।

अलग रास्ते, अलग पहचान: स्टारडम बनाम अभिनय

1980 के दशक की शुरुआत में, दोनों सितारों ने आपसी सहमति से अपने रास्ते अलग कर लिए थे ताकि एक-दूसरे के करियर में बाधा न बनें। रजनीकांत ने ‘स्वैगर’ और ‘मास स्टारडम’ का रास्ता चुना और बॉक्स ऑफिस के निर्विवाद राजा बन गए। दूसरी ओर, कमल हासन ने प्रयोगधर्मिता, विविधता और अभिनय की बारीकियों को प्राथमिकता दी।

मद्रास (अब चेन्नई) की माउंट रोड पर जब इन दोनों की फिल्मों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स आमने-सामने लगते थे, तो सिनेमाघरों में दिवाली जैसा माहौल होता था। प्रशंसकों के बीच यह दीवानगी ऐसी थी कि परिवारों तक में बंटवारा हो जाता था। 1991 की दिवाली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जब रजनीकांत की ‘थलपति’ और कमल हासन की ‘गुना’ एक साथ रिलीज हुई थीं। इसके बाद 2005 में ‘चंद्रमुखी’ और ‘मुंबई एक्सप्रेस’ के बीच भी ऐसी ही टक्कर देखी गई थी।

दो दर्शन, एक अटूट दोस्ती

व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, इन दोनों दिग्गजों के बीच की व्यक्तिगत दोस्ती हमेशा मिसाल रही है। कमल हासन ने एक बार उनके अलग-अलग रास्तों पर सटीक टिप्पणी की थी: “रजनी जवाब तलाशने के लिए हिमालय जाएंगे और मैं यहीं की सड़कों पर घूमकर यह पता लगाने की कोशिश करूंगा कि कहां जाना है।”

उनकी विचारधाराएं और जीवन दर्शन भले ही अलग हों, लेकिन वे उन दो मजबूत स्तंभों की तरह रहे हैं जिन्होंने दशकों तक तमिल फिल्म उद्योग की छत को थामे रखा है।

नेल्सन दिलीपकुमार के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी

निर्देशक नेल्सन के लिए इन दो महानायकों को एक ही फ्रेम में लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सत्तर के दशक की उम्र में भी ये दोनों सितारे आज की पीढ़ी के अभिनेताओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पुरानी यादों (Nostalgia) में डूबे प्रशंसकों के लिए यह फिल्म किसी ‘फेयरवेल टैंगो’ या एक महान उत्सव की तरह होगी।

रजनीकांत ने कभी सिंगापुर में ‘निनैथले इनिक्कम’ की शूटिंग के दौरान कमल के साथ बिताए उन सुनहरे पलों को याद किया था। अब, कई दशकों बाद, वे फिर से अपनी यादों की पोटली में कुछ और नए और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने के लिए तैयार हैं।

निष्कर्ष:
यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह दो महानायकों के उस सफर का सम्मान है जिसने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दी। नेल्सन की इस फिल्म के साथ, कॉलीवुड के रिक्टर स्केल पर एक ऐसी हलचल शुरू हो चुकी है, जो रिलीज के दिन इतिहास के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकती है।


प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026 | 06:00 AM IST

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