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भारतीय फैशन के ‘शिल्पी’ सब्यसाची मुखर्जी: ₹20,000 के कर्ज से लेकर ग्लोबल एम्पायर खड़ा करने तक का प्रेरक सफर

भारतीय फैशन के ‘शिल्पी’ सब्यसाची मुखर्जी

सब्यसाची मुखर्जी जन्मदिन: कभी आत्महत्या के बारे में सोचा, सब्यसाची मुखर्जी आज बॉलीवुड के सबसे बड़े फैशन डिजाइनर हैं।

नई दिल्ली/कोलकाता:

भारतीय फैशन जगत में जब भी सादगी, भव्यता और परंपरा के संगम की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले जेहन में आता है— सब्यसाची मुखर्जी। आज यानी 23 फरवरी को यह दिग्गज फैशन डिजाइनर अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉलीवुड की ‘बिग फैट वेडिंग्स’ से लेकर हॉलीवुड के रेड कार्पेट तक, सब्यसाची के डिजाइन्स ने भारतीय कारीगरी को एक नई वैश्विक पहचान दिलाई है।

लेकिन आज जिस ‘सब्यसाची’ ब्रांड का मूल्य करोड़ों में है, उसकी नींव सफलता के पत्थरों पर नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष, पारिवारिक विद्रोह और अटूट इच्छाशक्ति पर रखी गई थी।

शरणार्थी परिवार से ‘फैशन किंग’ बनने की शुरुआत

सब्यसाची का जन्म 23 फरवरी 1974 को कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता, जो बांग्लादेश से आए एक शरणार्थी थे, जूट मिल में काम करते थे और उनकी माँ एक शिक्षिका थीं। कला और रंगों के प्रति सब्यसाची का लगाव बचपन से ही था, लेकिन उनके पिता उन्हें एक इंजीनियर के रूप में देखना चाहते थे।

जब सब्यसाची ने अपने पिता के सामने फैशन डिजाइनिंग को करियर बनाने की इच्छा रखी, तो परिवार में इसका कड़ा विरोध हुआ। उनके पिता ने उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन सब्यसाची ने अपने सपनों से समझौता करने के बजाय एक कठिन रास्ता चुना।

वेटर की नौकरी से लेकर NIFT तक का सफर

महज 16 साल की उम्र में सब्यसाची ने घर छोड़ दिया और गोवा चले गए। वहां उन्होंने एक होटल में वेटर के रूप में काम किया ताकि वे निफ्ट (NIFT) की प्रवेश परीक्षा के फॉर्म और पढ़ाई के लिए पैसे जुटा सकें। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) में दाखिला लिया।

हालांकि, यह सफर मानसिक रूप से उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। आर्थिक तंगी, खुद को साबित करने का दबाव और पारिवारिक अलगाव के कारण वे गहरे अवसाद (Depression) का शिकार हो गए थे। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन उनकी माँ के अटूट विश्वास और स्वयं की रचनात्मकता ने उन्हें फिर से खड़ा होने का हौसला दिया।

₹20,000 का कर्ज और तीन कर्मचारियों से शुरुआत

1999 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद सब्यसाची के पास अपना काम शुरू करने के लिए संसाधन नहीं थे। उन्होंने अपनी बहन से ₹20,000 उधार लिए और सिर्फ तीन कर्मचारियों के साथ अपनी वर्कशॉप शुरू की। शुरुआती दिनों में वे अपनी वर्कशॉप में ही सोते थे और दिन-रात डिजाइन तैयार करने में जुटे रहते थे।

उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प, खादी और पारंपरिक बुनाई को आधुनिकता के साथ जोड़कर एक ऐसी शैली विकसित की, जिसने धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया।

आज का सब्यसाची: एक ग्लोबल ब्रांड

आज सब्यसाची मुखर्जी केवल एक डिजाइनर नहीं, बल्कि एक ‘इंस्टीट्यूशन’ बन चुके हैं। दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, प्रियंका चोपड़ा और कटरीना कैफ जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपनी शादी के लिए सब्यसाची के जोड़ों को ही चुना। उन्होंने ‘सब्यसाची आर्ट फाउंडेशन’ के जरिए विलुप्त हो रही भारतीय कलाओं को पुनर्जीवित किया है।

लंदन के प्रतिष्ठित डिपार्टमेंटल स्टोर ‘हैरोड्स’ से लेकर न्यूयॉर्क तक, उनके स्टोर भारतीय संस्कृति की चमक बिखेर रहे हैं। आज उनका ब्रांड करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है, जो इस बात का गवाह है कि यदि प्रतिभा के साथ जिद्दी संकल्प हो, तो शून्य से शिखर तक का सफर तय करना असंभव नहीं है।

सब्यसाची मुखर्जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं! उनका जीवन आने वाले युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि सपने वही सच होते हैं जिन्हें देखने और जीने की हिम्मत की जाए।


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