खेल जगत

जोहान्स क्लेबो ने रचा इतिहास, 50 साल पुराना ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ जीते 6 स्वर्ण पदक

शीतकालीन ओलंपिक 2026: क्लेबो ने क्रॉस-कंट्री में ऐतिहासिक स्वीप पूरा किया, स्पीडस्केटिंग में स्टोल्ज़ चौथे स्थान पर

शीतकालीन ओलंपिक 2026: क्लेबो ने क्रॉस-कंट्री में ऐतिहासिक स्वीप पूरा किया, स्पीडस्केटिंग में स्टोल्ज़ चौथे स्थान पर

मिलान/कॉर्टिना:
नॉर्वे के क्रॉस-कंट्री स्कीइंग दिग्गज जोहान्स होसफ्लोट क्लेबो ने रविवार को शीतकालीन ओलंपिक के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर लिया। क्लेबो ने पुरुषों की 50 किमी मास स्टार्ट क्लासिक स्पर्धा में जीत हासिल कर एक ही शीतकालीन ओलंपिक में किसी एथलीट द्वारा सर्वाधिक स्वर्ण पदक जीतने का विश्व रिकॉर्ड बना दिया।

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क्लेबो का ‘सिक्सर’: एरिक हेडेन का रिकॉर्ड ध्वस्त

मिलान कॉर्टिना गेम्स में क्लेबो का यह छठा स्वर्ण पदक था। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के स्पीड स्केटर एरिक हेडेन द्वारा 1980 के लेक प्लेसिड ओलंपिक में बनाए गए 5 स्वर्ण पदकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जो पिछले 46 वर्षों से अटूट था।

इतना ही नहीं, क्लेबो के करियर में अब कुल 11 ओलंपिक स्वर्ण पदक हो गए हैं, जिससे वह शीतकालीन ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल एथलीटों में से एक बन गए हैं। सर्वकालिक ओलंपिक रिकॉर्ड की बात करें तो अब वह केवल अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स (23 स्वर्ण) से पीछे हैं। इस स्पर्धा में नॉर्वे का दबदबा ऐसा रहा कि मार्टिन न्येनगेट ने रजत और एमिल इवरसन ने कांस्य जीतकर ‘नॉर्वेजियन स्वीप’ पूरा किया।

स्पीड स्केटिंग: 40 की उम्र में बर्गस्मा का जलवा

स्पीड स्केटिंग रिंक पर नीदरलैंड के जोरिट बर्गस्मा ने उम्र को महज एक संख्या साबित कर दिया। 40 वर्षीय बर्गस्मा ने पुरुषों की मास स्टार्ट में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक इतिहास के सबसे उम्रदराज स्पीड स्केटिंग चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, अमेरिका के उभरते सितारे जॉर्डन स्टोल्ज़ पदक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। महिलाओं की स्पर्धा में भी डच खिलाड़ी मारिजके ग्रोएनवूड ने स्वर्ण पर कब्जा जमाया।

अमेरिका का ऐतिहासिक प्रदर्शन: गोल्ड मेडल की संख्या 11 पहुंची

संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह ओलंपिक यादगार साबित हुआ। मिक्स्ड एरियल्स टीम (कैला कुह्न, कॉनर कुरेन और क्रिस लिलिस) ने स्वर्ण जीतकर अमेरिका के लिए इन खेलों का 11वां स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। यह किसी भी शीतकालीन ओलंपिक में अमेरिका का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, जिसने 2002 के साल्ट लेक सिटी ओलंपिक (10 स्वर्ण) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

आइस हॉकी और कर्लिंग: फिनलैंड और कनाडा की धाक

  • आइस हॉकी: पुरुषों के कांस्य पदक मुकाबले में फिनलैंड ने स्लोवाकिया को 6-1 से करारी शिकस्त दी। एरिक हाउला और जोएल आर्मिया के शानदार प्रदर्शन की बदौलत फिनलैंड ने लगातार तीसरे ओलंपिक में पदक हासिल किया। स्वर्ण पदक के लिए अब अमेरिका और कनाडा के बीच भिड़ंत होगी।

  • कर्लिंग: कर्लिंग के पावरहाउस कहे जाने वाले कनाडा ने पुरुषों के फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को 9-6 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, कनाडाई महिला टीम ने अमेरिका को हराकर कांस्य पदक जीता।

मेजबान इटली का स्वर्णिम अंत

मिलान कॉर्टिना के आयोजक देश इटली के लिए अंतिम दिन खुशियों भरा रहा। पुरुषों के स्कीक्रॉस फाइनल में सिमोन डेरोमेडिस ने स्वर्ण और फ़ेडरिको टोमासोनी ने रजत जीतकर इतिहास रचा। इटली ने इन खेलों में कुल 10 स्वर्ण सहित 30 पदक जीते, जो 1994 के लिलीहैमर ओलंपिक (20 पदक) के बाद उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

अन्य प्रमुख उपलब्धियां:

  • कैली हम्फ्रीज़ आर्मब्रस्टर: अमेरिकी बोबस्लेय स्टार ने अपने करियर का छठा ओलंपिक पदक जीतकर एलाना मेयर्स टेलर के रिकॉर्ड की बराबरी की।

  • स्किमो (Skimo) डेब्यू: स्की पर्वतारोहण के ओलंपिक पदार्पण में फ्रांस की एमिली हैरोप और थिबॉल्ट एंसलमेट की जोड़ी ने मिक्स्ड रिले में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।

मिलान कॉर्टिना 2026 के ये खेल न केवल रिकॉर्ड तोड़ने के लिए बल्कि नए खेलों के रोमांचक आगाज के लिए भी याद किए जाएंगे।


 

शीतकालीन ओलंपिक का इतिहास: बर्फ और रोमांच के खेलों का एक सदी का सफर

शीतकालीन ओलंपिक (Winter Olympics) दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में से एक है, जो विशेष रूप से बर्फ (Ice) और हिमपात (Snow) पर खेले जाने वाले खेलों पर केंद्रित होती है। जहाँ ग्रीष्मकालीन ओलंपिक का इतिहास प्राचीन यूनान (ग्रीस) से जुड़ा है, वहीं शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत तुलनात्मक रूप से आधुनिक है।

यहाँ शीतकालीन ओलंपिक के इतिहास के प्रमुख पड़ाव और रोचक जानकारियां दी गई हैं:

1. शुरुआत: शैमोनी 1924

शीतकालीन ओलंपिक की आधिकारिक शुरुआत 1924 में फ्रांस के शैमोनी (Chamonix) शहर से हुई थी। हालाँकि, इससे पहले 1908 के लंदन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में ‘फिगर स्केटिंग’ और 1920 के एंटवर्प खेलों में ‘आइस हॉकी’ को शामिल किया जा चुका था। शैमोनी में आयोजित इस आयोजन को पहले “अंतर्राष्ट्रीय शीतकालीन खेल सप्ताह” कहा गया था, लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए 1925 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने इसे आधिकारिक तौर पर प्रथम शीतकालीन ओलंपिक घोषित कर दिया।

2. ग्रीष्मकालीन खेलों से अलगाव (1994 का बदलाव)

1992 तक, शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन ओलंपिक दोनों एक ही वर्ष में आयोजित किए जाते थे। लेकिन ओलंपिक चार्टर में बदलाव के बाद, आईओसी ने इन्हें दो साल के अंतराल पर (Staggered schedule) आयोजित करने का निर्णय लिया। इस ऐतिहासिक बदलाव के कारण, 1994 में लिलीहैमर (नॉर्वे) में शीतकालीन खेल आयोजित किए गए, जो पिछले खेलों के मात्र दो साल बाद हुए थे। तब से ये खेल ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के बीच के सम वर्षों में होते हैं।

3. प्रमुख खेल और स्पर्धाएं

शुरुआत में केवल 5 खेल (9 स्पर्धाएं) शामिल थे:

  • स्की जंपिंग

  • क्रॉस-कंट्री स्कीइंग

  • फिगर स्केटिंग

  • आइस हॉकी

  • नॉर्डिक कंबाइंड, बॉबस्लेय, और कर्लिंग।

आज इन खेलों का विस्तार हो चुका है और अब इसमें अल्पाका स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग, फ्रीस्टाइल स्कीइंग, स्केलेटन, और लुग (Luge) जैसे कई आधुनिक और साहसी खेल शामिल हो चुके हैं। 2026 के मिलान कॉर्टिना खेलों में ‘स्की पर्वतारोहण’ (Skimo) का भी पदार्पण हो रहा है।

4. शीतकालीन खेलों की महाशक्ति: नॉर्वे

जब बात शीतकालीन ओलंपिक की आती है, तो नॉर्वे निर्विवाद रूप से दुनिया का सबसे सफल देश है। नॉर्वे ने अब तक के इतिहास में सर्वाधिक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते हैं। जर्मनी, अमेरिका और ऑस्ट्रिया भी इन खेलों के अन्य प्रमुख दिग्गज माने जाते हैं।

5. भारत और शीतकालीन ओलंपिक

भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश के लिए शीतकालीन ओलंपिक हमेशा से एक चुनौती रहा है। भारत ने पहली बार 1964 के इंसब्रुक (ऑस्ट्रिया) ओलंपिक में भाग लिया था, जहाँ जेरेमी बुजाकोव्स्की ने अल्पाइन स्कीइंग में देश का प्रतिनिधित्व किया था।

  • शिवा केशवन: भारत के सबसे प्रसिद्ध शीतकालीन ओलंपिक एथलीट हैं। उन्होंने लुग (Luge) स्पर्धा में रिकॉर्ड 6 बार भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

  • भले ही भारत ने अब तक इन खेलों में कोई पदक नहीं जीता है, लेकिन हाल के वर्षों में आरिफ खान जैसे एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उपस्थिति दर्ज कराई है।

6. ऐतिहासिक विवाद और चुनौतियां

  • द्वितीय विश्व युद्ध: 1940 और 1944 के शीतकालीन खेल विश्व युद्ध के कारण रद्द कर दिए गए थे।

  • जलवायु परिवर्तन: वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग शीतकालीन खेलों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बर्फ की कमी के कारण अब कई आयोजनों में ‘कृत्रिम बर्फ’ (Artificial Snow) का बड़े पैमाने पर उपयोग करना पड़ता है।

7. भविष्य: मिलान कॉर्टिना 2026

अगला शीतकालीन ओलंपिक 2026 में इटली के मिलान और कॉर्टिना डी’अम्पेज़ो में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन अपनी आधुनिकता और स्थिरता (Sustainability) के लिए जाना जाएगा, जिसमें जोहान्स क्लेबो और जॉर्डन स्टोल्ज़ जैसे सुपरस्टार्स पर दुनिया की नजरें होंगी।

निष्कर्ष:
शीतकालीन ओलंपिक केवल पदक जीतने की प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों में मानवीय साहस और कौशल का उत्सव है। 1924 में एक छोटे से ‘खेल सप्ताह’ से शुरू हुआ यह सफर आज अरबों दर्शकों तक पहुँच चुका है।

प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026 | 10:08 AM IST

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