धर्म

दत्तात्रेय जयंती 2025: आत्मज्ञान, योग और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश, दत्तात्रेय जयंती पर विशेष पूजा.

Dattatreya Jayanti 2025

दत्तात्रेय जयंती भगवान दत्तात्रेय की जयंती के रूप में मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय को त्रिमूर्ति – ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का संयुक्त अवतार माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने मानव जीवन को ज्ञान, योग, भक्ति, संयम और प्रकृति से जुड़ाव की प्रेरणा दी। यह जयंती मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो साधकों, योगियों, तपस्वियों और भक्तों के लिए बहुत पवित्र दिन है।

भगवान दत्तात्रेय का परिचय

भगवान दत्तात्रेय को योगियों का गुरु, त्रिगुण पुरुष और गुरु परंपरा का आदि गुरु माना जाता है। उनका जन्म देवी अनसूया और ऋषि अत्रि से हुआ था। कथा के अनुसार, त्रिदेव उनकी घोर तपस्या और भक्ति शक्ति की परीक्षा लेने आए थे और अनुसूया की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्होंने अपने संयुक्त रूप में दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया।

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दत्तात्रेय जयंती का महत्व

यह दिन आत्मज्ञान, योगाभ्यास और गुरु कृपा प्राप्त करने का विशेष पर्व माना जाता है। दत्तात्रेय जयंती पर भक्त भगवान के ज्ञान, त्याग, वैराग्य और प्रकृति से सीखी गई जीवनशैली को आत्मसात करने का प्रयास करते हैं।

इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, दत्तात्रेय चालीसा और स्तोत्र का पाठ करते हैं, आध्यात्मिक अभ्यास और ध्यान में समय बिताते हैं।

भगवान दत्तात्रेय ने प्रकृति को अपना गुरु माना और 24 गुरुओं से जीवन का सत्य सीखने की प्रेरणा दी। उनके मुख्य संदेश हैं – प्रकृति हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है। योग, ध्यान और आत्मनिरीक्षण जीवन को सार्थक बनाते हैं। मनुष्य को भौतिक सुखों की इच्छा त्याग कर ज्ञान और संतोष की ओर बढ़ना चाहिए। जीवन की राह को रोशन करने में गुरु का महत्व अहम है।

दत्तात्रेय जयंती की पूजा विधि इस प्रकार है-

-मंदिरों में भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति या तस्वीर की पूजा की जाती है। मंत्र- “ॐ द्रां दत्तात्रेय नमः” का जाप किया जाता है।

पूर्णिमा के दिन भक्त व्रत रखते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।

-गिरनार (गुजरात), औंधा नागनाथ (महाराष्ट्र), पीथापुरम (आंध्र प्रदेश) और नारायणपुर (कर्नाटक) जैसी जगहों पर विशेष मेले और धार्मिक कार्यक्रम लगते हैं।

-इस दिन, भक्त गहन योग अभ्यास और ध्यान करके आंतरिक शांति और ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

इस त्यौहार का न केवल धार्मिक महत्व है, बल्कि यह मानव जीवन को सादगी, सदाचार, ज्ञान और गुरुभक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा ज्ञान बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि अपने भीतर ही खोजना चाहिए।

दत्तात्रेय जयंती अध्यात्म, योग, गुरुभक्ति और आत्मज्ञान का पर्व है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति, गुरु और आत्मनिरीक्षण ही जीवन के वास्तविक मार्गदर्शक हैं। यदि हम भगवान दत्तात्रेय के संदेशों को अपनाएं तो हम एक संतुलित, शांतिपूर्ण और बुद्धिमान जीवन जी सकते हैं।

– शुभा दुबे

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