📅 Saturday, February 14, 2026 🌡️ Live Updates
धर्म

विनायक चतुर्थी 2025: मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

Vinayak Chaturthi 2025

आज मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत है, हिंदू धर्म में हर माह की चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन मार्गशीर्ष माह की विनायक चतुर्थी का महत्व इससे भी अधिक है। विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में जाने जाने वाले भगवान गणेश की पूजा सफलता, समृद्धि, शांति और मन की स्पष्टता लाने के लिए की जाती है, तो आइए हम आपको मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के महत्व और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

जानिए मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के बारे में

मार्गशीर्ष माह को देवताओं का प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और मनुष्य को विद्या, बुद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस बार यह चतुर्थी 24 नवंबर को मनाई जाएगी। स्कंद पुराण में मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी को विशेष सिद्धिप्रदा बताया गया है। भगवान गणेश को समर्पित विनायक चतुर्थी, हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले सबसे शुभ दिनों में से एक है। यह अत्यंत शुभ महीने में पड़ने वाली विनायक चतुर्थी है जिसमें गहरी आध्यात्मिक शक्ति है।

यह भी पढ़ें: Som Pradosh Vrat: मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत पर शिव पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी का भी विशेष धार्मिक महत्व है।

गणेश पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी को विशेष सिद्धिप्रदा बताया गया है। पंडितों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने वालों की मनोकामनाएं जल्द ही पूरी होती हैं। यह तिथि नए कार्य प्रारंभ करने, शिक्षा, करियर, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने और दोपहर के समय भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह दिन विशेषकर बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और व्यापार में सफलता के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन गणपति का व्रत और पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं, कष्ट और परेशानियां दूर हो जाती हैं। भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से यह व्रत रखता है, उसके घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का वास होता है। गणेश जी को बुद्धि का देवता भी माना जाता है। विद्यार्थियों और विद्या की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह व्रत बहुत फलदायी है। इस दिन व्रत, पूजन और दूर्वा चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा

पंडितों के अनुसार मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के दिन पूजा के लिए घर के मंदिर या किसी शुभ स्थान पर लकड़ी के पाट पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या साफ तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेते समय भगवान गणेश से परिवार की सुख-समृद्धि, ज्ञान में वृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना की जाती है। इसके बाद भगवान गणेश पर गंगा जल छिड़क कर जलाभिषेक किया जाता है और चंदन, रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल फूल और सुगंधित अगरबत्ती अर्पित की जाती है। चतुर्थी तिथि पर दूर्वा, मोदक और गुड़-तिल के लड्डू भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं इसलिए इनका भोग अवश्य लगाना चाहिए। पूजा के दौरान गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तुति, गणेश चालीसा या ‘ओम गं गणपतये नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। यह मंत्र जीवन से बाधाओं को दूर करता है और मन को एकाग्र करने में मदद करता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करना चाहिए। पंडितों के अनुसार इस दिन फल खाया जा सकता है और एक समय भोजन करने का नियम भी रखा जा सकता है। शाम के समय फिर से दीपक जलाना चाहिए और भगवान गणेश की आरती करनी चाहिए।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के दिन पूजा करने से मिलते हैं ये फल.

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। पंडितों के अनुसार इस दिन पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं और सभी कार्य आसानी से पूरे हो जाते हैं। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह याददाश्त, एकाग्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है। गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि का दाता कहा गया है। इस दिन पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है। यह व्रत परिवार में सद्भाव, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। वैवाहिक जीवन की परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के दिन इन चीजों का भोग लगाएं

पंडितों के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा घास की 21 गांठें चढ़ाएं। भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। उन्हें लाल फूल, विशेषकर गुड़हल के फूल और माला चढ़ाएं। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के दिन इन्हें अर्पित करें और मंत्र का जाप करें।

पंडितों के अनुसार भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। प्रसाद में तुलसी दल का प्रयोग न करें। इस दिन गणेश चालीसा का पाठ करें और ‘ओम गं गणपतये नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा समाप्त करने से पहले विनायक चतुर्थी की व्रत कथा सुनें।

जानिए मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत के नियम

पंडितों के अनुसार, कई भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं। आप फल और दूध से बने उत्पाद खा सकते हैं, अनाज और नमक से परहेज करें। अपने विचार सकारात्मक और शांत रखें। शाम के समय उत्तर-पश्चिम दिशा में दीपक जलाएं, जो गणेशजी के लिए अच्छा माना जाता है। ध्यान करें और अपने जीवन में आए आशीर्वादों के लिए आभारी रहें।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी रोचक है।

मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी की कहानी में दो मुख्य घटनाएँ हैं: एक शिव-पार्वती का चौपड़ खेलना और दूसरा हनुमान जी द्वारा भगवान श्री राम की सहायता के लिए गणेश व्रत करना। चौपर खेल की कहानी में, देवी पार्वती ने एक मिट्टी का लड़का बनाया था जिसे जीत या हार का फैसला करने के लिए बनाया गया था। हनुमान जी ने भगवान राम के कार्य में सहायता करने के लिए विनायक चतुर्थी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से वे समुद्र पार करने में सफल हुए।

-प्रज्ञा पांडे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!