धर्म

षटतिला एकादशी पर करें भगवान विष्णु के इन दिव्य मंत्रों का जाप, मिलेगी हर संकट से मुक्ति

षटतिला एकादशी पर करें भगवान विष्णु के इन दिव्य मंत्रों का जाप, मिलेगी हर संकट से मुक्ति

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं और हर महीने में दो एकादशियों पर व्रत रखा जाता है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को शतीला जिसे एकादशी के नाम से जाना जाता है. कल यानी 14 जनवरी शतीला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शतीला एकादशी के दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान श्रीहरि ईश्वर की कृपा से बिगड़े काम बन जाते हैं।

शतीला एकादशी के दिन इन चीजों का दान करें

एकादशी के पवित्र दिन पर तिल और गर्म कपड़ों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इसकी मान्यता है शतीला एकादशी के दिन किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाता है और आर्थिक उन्नति के अवसर प्रदान करता है। इस दिन दान करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और धन लाभ की संभावनाएं प्रबल होती हैं।

श्री हरि विष्णु के 108 नाम

ओह श्रीमान विष्णवे नम:

ओह श्रीमान ईश्वर नम:

ओह मिस्टर विराट पुरुषाय नम:

ओह श्रीक्षेत्र क्षेत्रीय क्रम नम:

ओह श्रीमान केशवय नम:

ओह श्रीमान पुरूषोत्तमाय नम:

ओह श्रीमान ईश्वरया नम:

ओह श्रीमान हृषिकेशाय नम: :

ओह श्रीमान पद्मनाभय नम: :

ओह श्रीमान विश्वकर्मणे नम: :

ओह श्रीमान कृष्णया नम: :

ओह श्रीमान प्रजापतये नम: :

ओह श्रीमान हिरण्यगर्भय नम: :

ओह श्रीमान सुरेशाय नम: :

ओह श्रीमान सर्व-भूत नम: :

ओह श्रीमान सर्वेश्वराय नम: :

ओह श्रीमान अचूक नम: :

ओह श्रीमान वासुदेवाय नम: :

ओह श्रीमान पुण्डरीक्षय नम: :

ओह श्रीमान नर-नारायण नम: :

ओह श्रीमान जनार्दनाय नम: :

– उह श्रीमान सार्वजनिक वक्ता नम: :

ओह श्रीमान चौकोर नम: :

ओह श्रीमान बिशप नम: :

ओह श्रीमान उपेन्द्रय नम: :

ओह श्रीमान माधवे नम: :

ओह श्रीमान महाबलय नम: :

ओह श्रीमान गोविंदाय नम: :

– उह श्रीमान प्रजापतये नम: :

ओह श्रीमान विश्वात्मने नम: :

ओह श्रीमान सहस्त्रक्षाय नम: :

ओह श्रीमान नारायणाय नम: :

ओह श्रीमान सिद्ध किया हुआ। संकल्प नम: :

ओह श्रीमान महेन्दरया नम: : 

 ओह श्रीमान वामनया नम: :

ओह श्रीमान अनंतजीते नम: :

– उह श्रीमान महिधराई नम: :

– उह श्रीमान ईगल ध्वज नम: :

ओह श्रीमान लक्ष्मीपतये नम: :

ओह श्रीमान दामोदराय नम: :

ओह श्रीमान कमलापतये नम: :

ओह श्रीमान परमेश्वराय नम: :

ओह श्रीमान धनेश्वराय नम: :

– उह श्रीमान मुकुंदया नम: :

ओह श्रीमान आनंदया नम: :

ओह श्रीमान सच्चा धर्म नम: :

ओह श्रीमान उपेन्द्रय नम: :

ओह श्रीमान चक्रगदाधारय नम: :

ओह श्रीमान भगवते नम

ओह श्रीमान शांतिपूर्ण नम: :

ओह श्रीमान गोपतये नम: :

– उह श्रीमान श्रीपतये नम: :

ओह श्रीमान श्रीहरि नम: :

ओह श्रीमान श्रीरघुनाथाय नम: :

ओह श्रीमान कपिलेश्वराय नम: :

ओह श्रीमान वराहाय नम: :

ओह श्रीमान नरसिंघे नम: :

ओह श्रीमान रामय नम: :

-ऊह श्रीमान हयग्रीवय नम: :

-ऊह श्रीमान समुच्छेदक नम: :

ओह श्रीमान शुद्ध आत्मा नम : :

ओह श्रीमान केशवया नम: :

ओह श्रीमान धनंजय नम: :

ओह श्रीमान ब्राह्मण-प्रेमी नम: :

ओह श्रीमान श्रीमान यदुश्रेष्ठय नम: :

– उह श्रीमान लोकनाथाय नम: :

ओह श्रीमान भक्तवत्सलय नम: :

ओह श्रीमान चतुर्मुर्तये नम: :

ओह श्रीमान एक कार्यकाल नम: :

ओह श्रीमान सुलोचनाय नम: :

ओह श्रीमान सर्व-भूत नम: :

ओह श्रीमान सप्तवाहनय नम: :

ओह श्रीमान वंशवर्धनाय नम: :

– उह श्रीमान योगिनी नम: :

ओह श्रीमान आर्चर नम: :

ओह श्रीमान प्रीतिवर्धनाय नम: :

ओह श्रीमान प्रीतिवर्धनाय नम

ओह श्रीमान अक्रूराई नम: :

– उह श्रीमान दुःस्वप्न हत्यारा नम: :

ओह श्रीमान भुभावे नम: :

– उह श्रीमान जीवन देने वाला नम: :

ओह श्रीमान देवकी नंदनाय नम: :

ओह श्रीमान शंख भृत्य नम: :

ओह श्रीमान सुरेशाय नम: :

ओह श्रीमान कमलनयनाय नम: :

– उह श्रीमान विश्व नेता नम: :

ओह श्रीमान शाश्वत नम: :

– उह श्रीमान सच्चिदानंदाय नम: :

ओह श्रीमान द्वारकानाथय नम: :

– उह श्रीमान दानवेन्द्र विनाशकारी नम: :

– उह श्रीमान दया निधि नम: :

– उह श्रीमान एकचित्त नम: :

ओह श्रीमान शत्रु पर विजय प्राप्त करो नम: :

ओह श्रीमान घनशयामाय नम: :

ओह श्रीमान सार्वजनिक वक्ता नम: :

ओह श्रीमान अल्प-मृत्यु-वर्जित नम: :

ओह श्रीमान सर्व-भूत नम: :

ओह श्रीमान महान व्यक्ति नम: :

ओह श्रीमान यशोदानंदनाय नम: :

-ऊह श्रीमान परम धर्म नम: :

ओह श्रीमान ईगल ध्वज नम: :

ओह श्रीमान प्रभाव नम: :

ओह श्रीमान लक्ष्मीकान्तजय नम: :

ओह श्रीमान आकाश की तरह नम: :

ओह श्रीमान वामनया नम: :

ओह श्रीमान हँसना नम: :

– उह श्रीमान व्यापार नम: :

ओह श्रीमान उपस्थिति नमः

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