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मकर संक्रांति 2025: तिथि, समय, महत्व, अनुष्ठान, क्षेत्रीय उत्सव और बहुत कुछ देखें

मकर संक्रांति 2025: तिथि, समय, महत्व, अनुष्ठान, क्षेत्रीय उत्सव और बहुत कुछ देखें

मकर संक्रांति, सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक, सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का जश्न मनाता है और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित, यह कार्यक्रम सूर्य देव का सम्मान करता है और नवीकरण, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। 2025 में, मकर संक्रांति 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी, जिसमें शुभ मुहूर्त समय का पालन किया जाएगा।

मकर संक्रांति 2025: तिथि और समय

मकर संक्रांति पर मंगलवार, 14 जनवरी 2025

► पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 09:03 बजे से शाम 06:04 बजे तक (अवधि: 9 घंटे)

► महा पुण्य काल मुहूर्त: प्रातः 09:03 बजे से प्रातः 10:57 बजे तक (अवधि: 1 घंटा, 54 मिनट)

► मकर संक्रांति क्षण: 09:03 पूर्वाह्न, 14 जनवरी, 2025

►पुण्य काल और महा पुण्य काल आध्यात्मिक प्रथाओं, धर्मार्थ कार्यों और धार्मिक संस्कारों को करने के लिए अत्यधिक शुभ अवधि हैं।

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति फसल के मौसम की शुरुआत करती है और पृथ्वी पर जीवन के पोषण के लिए भगवान सूर्य (सूर्य देव) का सम्मान करती है। यह त्योहार अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतिनिधित्व करता है और नई शुरुआत, समृद्धि और कृतज्ञता का प्रतीक है। नए उद्यम और आध्यात्मिक अभ्यास शुरू करने के लिए यह एक आदर्श समय है।

विविध क्षेत्रीय नाम और उत्सव

मकर संक्रांति पूरे भारत में अनोखी परंपराओं के साथ मनाई जाती है:

►तमिलनाडु: पोंगल के रूप में जाना जाता है, इसमें प्रकृति और सूर्य को धन्यवाद देने के लिए एक मीठा पकवान पकाना शामिल है।

► गुजरात और राजस्थान: इसे उत्तरायण कहा जाता है, जहां पतंग उड़ाने से आसमान जीवंत रंगों से भर जाता है।

► पंजाब और हरियाणा: माघी के रूप में जाना जाने वाला यह त्योहार, लोग नदियों में अनुष्ठानिक डुबकी लगाते हैं और गुड़ और खीर जैसी मिठाइयों का आनंद लेते हैं।

मकर संक्रांति के दौरान मनाए जाने वाले अनुष्ठान

यह त्यौहार विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों से चिह्नित है:

►नदियों में पवित्र डुबकी: ऐसा माना जाता है कि गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से आत्मा शुद्ध हो जाती है।

►नैवेद्य अर्पित करना: भक्त विशेष व्यंजन तैयार करते हैं और उन्हें भगवान सूर्य को अर्पित करते हैं।

► धर्मार्थ कार्य: पुण्य काल में अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से आशीर्वाद मिलता है।

► पूर्वज अनुष्ठान: श्राद्ध कर्म करने से पितरों का सम्मान होता है।

► व्रत तोड़ना (पराना): कई लोग व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त के दौरान उन्हें समाप्त करते हैं।

उत्सवों में क्षेत्रीय विविधताएँ

प्रत्येक राज्य अपना सांस्कृतिक स्वभाव जोड़ता है:

► महाराष्ट्र: लोग एकता और सद्भाव का प्रतीक तिल और गुड़ की मिठाइयाँ साझा करते हैं।

► पश्चिम बंगाल: प्रसिद्ध गंगा सागर मेला तीर्थयात्रियों को गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम तक खींचता है।

► दक्षिण भारत: परिवार जटिल कोलम डिज़ाइनों और दावतों के साथ पोंगल मनाते हैं।

► गुजरात: उत्तरायण के दौरान पतंग उड़ाने से समुदाय खुशी में एक साथ आते हैं।

मकर संक्रांति आस्था, कृतज्ञता और एकता का उत्सव है। इसकी परंपराएँ प्रकृति के चक्रों के प्रति दया, आनंद और श्रद्धा को बढ़ावा देती हैं। चाहे आप इसे पोंगल, उत्तरायण, या माघी के रूप में मनाएं, त्योहार की भावना सूर्य की जीवनदायिनी शक्ति का सम्मान करने में विविध संस्कृतियों को एकजुट करती है।

मकर संक्रांति 2025 आपके जीवन को समृद्धि, गर्मजोशी और खुशियों से भर दे!

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