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धर्म

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के ठीक बाद 48 घंटे तक सूर्य ग्रहण, भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां

Mahashivratri 2026

आज 15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस साल 2026 की महाशिवरात्रि बेहद खास होने वाली है. 15 फरवरी को त्योहार मनाने के ठीक बाद 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. ऐसा माना जाता है कि जब भी महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहार और ग्रहण के बीच इतना कम समय होता है, तो ब्रह्मांड में ऊर्जा का भारी उतार-चढ़ाव होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण से पहले का समय और सूतक बहुत प्रभावशाली होता है।

ऐसे में महाशिवरात्रि की पूजा और उसके बाद के 48 घंटों में कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं, नहीं तो आपकी साधना सफल हो सकती है और आपको महादेव का आशीर्वाद मिल सकता है।

ग्रहण का प्रभाव एवं शिवरात्रि का ध्यान

ऐसे में 15 फरवरी की रात भक्त निशिता काल में महादेव की पूजा करेंगे. इसके बाद ग्रहण का सूतक काल और प्रभाव शुरू हो जाएगा. 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगने वाला है, लेकिन इसकी ऊर्जा का एहसास महाशिवरात्रि व्रत के समापन के समय से ही महसूस किया जा सकेगा. सूर्य ग्रहण के इतना करीब आने से महाशिवरात्रि की पूजा में मानसिक पवित्रता और संकल्प शक्ति का महत्व और भी बढ़ जाता है।

इसलिए यह समय नकारात्मक ऊर्जा को त्यागने और मंत्र शक्ति के माध्यम से अपनी रक्षा करने का है। इस दौरान की गई शिव साधना न सिर्फ आपको परेशानियों से मुक्ति दिलाएगी बल्कि आने वाले ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से भी बचाने में मदद करेगी।

पूजा में न करें ये गलतियां

शिव भक्तों आपको महाशिवरात्रि से लेकर ग्रहण समाप्ति तक कुछ बातों का बेहद ध्यान रखना होगा। शिवरात्रि का व्रत विधि-विधान से करें और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें। ग्रहण के प्रभाव से मन में नकारात्मक विचार या क्रोध उत्पन्न हो सकता है, इसलिए महादेव के मंत्र ‘ओम नम: शिवाय’ का मानसिक जाप लगातार करते रहें।

जब आप पूजा करें तो मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न रखें, क्योंकि ग्रहण के समय मानसिक स्थिति का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। जब आप दान-पुण्य का कार्य कर रहे हों तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप निस्वार्थ भाव से मदद कर रहे हैं, क्योंकि इस समय किया गया दान अनंत फल देने वाला माना जाता है।

महादेव की शरण और आध्यात्मिक सुरक्षा

शास्त्रों के अनुसार सच्चे मन से भगवान महादेव की पूजा करना व्यक्ति के जीवन से दोषों और ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर महाशिवरात्रि की पावन रात्रि में जो भक्त रात्रि जागरण करते हैं और शिव चालीसा का भावपूर्ण पाठ करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। ऐसा माना जाता है कि शिव की भक्ति भक्त के चारों ओर दैवीय सुरक्षा का कवच बनाती है, जो उसे प्रतिकूलताओं और बाधाओं से बचाती है।

ग्रहण से ठीक 48 घंटे पहले यह शिवरात्रि हमें आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनने का अवसर देती है। अगर आप शनि दोष, राहु-केतु की परेशानी या अन्य किसी ग्रह बाधा से परेशान हैं तो इस बार महाशिवरात्रि पर किया गया रुद्राभिषेक आपके लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। सही तरीके से की गई अटूट भक्ति और पूजा ही आपके जीवन में सुख और शांति का कारण बनेगी। सही तरीके से की गई अटूट भक्ति और पूजा आपके जीवन में सुख और शांति का कारण बनेगी।

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