धर्म

होलाष्टक अलर्ट: 8 दिनों तक भूलकर भी न करें ये काम, अशुभ ग्रहों का पड़ेगा बुरा प्रभाव

Holashtak Alert
होलाष्टक आज यानी 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू हो गया है। होलाष्टक यानि होली से पहले के 8 दिन जो हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। होलिका दहन के बाद शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्ट के समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या कोई नया कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है। इन 8 दिनों में व्यक्ति को भक्ति, आध्यात्मिक अभ्यास और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए। होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होता है और फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को समाप्त होता है।
होली से पहले के 8 दिनों में कुछ काम करना भी शुभ माना जाता है। आइए इस लेख में हम आपको बताते हैं कि होलाष्टक में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?
– धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक के दौरान भूलकर भी सगाई, नामकरण, विवाह, मुंडन आदि 16 संस्कार नहीं करने चाहिए क्योंकि इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
– इन 8 दिनों में आपको नया वाहन, प्रॉपर्टी, घर आदि खरीदने से भी बचना चाहिए। होलाष्टक के दौरान ये काम करना शुभ नहीं होता है।
– होलाष्टक के दौरान ग्रह उग्र रहते हैं. इस समय नया व्यवसाय प्रारंभ नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रहों की आक्रामकता का असर आपके काम पर पड़ सकता है।
– अगर आप घर बनवाने की सोच रहे हैं। इसलिए होलिका दहन तक ऐसा बिल्कुल भी न करें। धार्मिक मान्यता है कि होलाष्टक से पहले या बाद में जाना चाहिए। लेकिन अगर नौकरी बदलना जरूरी हो तो किसी कुशल ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाकर सलाह लेनी चाहिए।
होलाष्टक की अवधि में हवन और यज्ञ जैसे कार्य भी करना या करवाना वर्जित माना गया है। ऐसा करने से विपरीत प्रभाव का सामना करना पड़ता है।
होलाष्टक में क्या करना चाहिए?
– इन 8 दिनों में जप, तप और ध्यान बहुत अच्छा माना जाता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। ऐसे में होलाष्टक के दौरान भगवान की विधिवत पूजा और ध्यान करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों भक्त प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति अटूट भक्ति हो गई थी। ऐसे में आप होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ उनके मंत्र ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप भी कर सकते हैं।
– होलाष्टक के दौरान भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दौरान आप ‘ओम नम: शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।
होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि प्राचीन काल में भगवान शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था, जिससे ब्रह्मांड का संतुलन प्रभावित हुआ था। कहा जाता है कि उस दौरान आठ दिनों तक सभी ग्रह अत्यंत उग्र अवस्था में रहे थे। तभी से होलाष्टक की परंपरा शुरू मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में शुभ और मांगलिक कार्य करने से ग्रहों की बिगड़ी स्थिति के कारण नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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