📅 Monday, February 16, 2026 🌡️ Live Updates
धर्म

फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से साधक को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

Phalguna Amavasya
सनातन धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पूजा और व्रत करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना शुभ माना जाता है तो आइए आपको फाल्गुन अमावस्या व्रत और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

जानिए फाल्गुन अमावस्या के बारे में

हिंदू धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को अमावस्या के नाम से जाना जाता है। स्नान और पितरों की पूजा से लेकर सभी कार्यों के लिए सर्वोत्तम मानी जाने वाली इस अमावस्या का महत्व तब और बढ़ जाता है जब यह फाल्गुन माह में आती है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या कल 17 फरवरी 2026 को होगी. हिंदू मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या के दिन यदि किसी जल तीर्थ स्थल पर जाकर स्नान, जल दान और पितरों को तर्पण किया जाए तो सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

ये भी पढ़ें: शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव और शनिदेव की कृपा का महासंयोग, जानें पूजा का शुभ समय

फाल्गुन अमावस्या पर करें पीपल के पेड़ की पूजा से जुड़े ये उपाय, होगा लाभ

पंडितों के अनुसार हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इस पेड़ को पूर्वजों से जोड़कर भी देखा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी भी महीने की अमावस्या के दिन इसकी जड़ों को जल देकर सरसों के तेल का दीपक जलाया जाए तो पितरों के साथ-साथ देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है और परिवार का सुख-सौभाग्य बढ़ता है। अमावस्या तिथि के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से जीवन से जुड़ी सभी प्रकार की बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

फाल्गुन अमावस्या पर पितरों की पूजा से जुड़े उपाय करें, तरक्की होगी।

पंडितों के अनुसार अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है और आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं। साथ ही अगर आप अपने पितरों का विशेष आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो अमावस्या तिथि के दिन उनके लिए कुछ उपाय जरूर करें। हिंदू मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या के दिन यदि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक पितरों के लिए तर्पण और पितृसूक्त का पाठ किया जाए तो पितरों की विशेष कृपा बरसती है।

फाल्गुन अमावस्या पर करें स्नान संबंधी उपाय, मिलेगा पुण्य।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या के दिन पुण्य फल की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को किसी जल तीर्थ स्थल पर जाकर विशेष स्नान करना चाहिए। फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से भक्त के सभी पाप और दोष दूर हो जाते हैं। अमावस्या तिथि के दिन किसी जल तीर्थ पर स्नान करने से व्यक्ति को सुख और सौभाग्य के साथ-साथ सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।

आर्थिक तंगी दूर करने के लिए फाल्गुन अमावस्या पर करें ये उपाय।

हिंदू मान्यता के अनुसार, धन की देवी को प्रसन्न करने के लिए किसी भी महीने की अमावस्या तिथि बहुत शुभ और फलदायी मानी जाती है। ऐसे में इस दिन व्यक्ति को अपने घर की साफ-सफाई करने के बाद देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए और उनके मंत्र का जाप करना चाहिए। अमावस्या के दिन खासतौर पर अपने घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और घर के किसी भी कोने में अंधेरा न रखें।

फाल्गुन अमावस्या के दिन इन चीजों का दान करें

शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या पर स्नान के साथ-साथ दान की भी विशेष परंपरा है। इस तिथि पर यदि कोई व्यक्ति किसी जल तीर्थ पर स्नान करने के बाद जरूरतमंद लोगों या किसी पुजारी या कर्मकांडी ब्राह्मण को तिल, वस्त्र, भोजन, गाय, गुड़, घी, काले जूते, काला छाता और धन आदि का दान करता है, तो उसके जीवन से जुड़े दुख और दोष दूर हो जाते हैं और उसे पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

फाल्गुन अमावस्या का शुभ समय

पंचांग के अनुसार फाल्गुन अमावस्या 16 फरवरी 2026 को शाम 5:34 बजे शुरू होगी और 17 फरवरी 2026 को शाम 5:30 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार यह अमावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी.

फाल्गुन अमावस्या पर स्नान का भी विशेष महत्व है

शास्त्रों के अनुसार इस दिन देवी-देवता गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में निवास करते हैं। इसलिए इन नदियों में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह अमावस्या सुख, संपत्ति और सौभाग्य बढ़ाने वाली मानी जाती है। यह हिंदू कैलेंडर की आखिरी अमावस्या भी है। इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा-अर्चना करना बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार या शनिवार को आती है तो इसका महत्व सूर्य ग्रहण से भी अधिक माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या पर ऐसे करें पितरों का तर्पण.

पंडितों के अनुसार तांबे या पीतल के लोटे में साफ जल भरें।
इसमें थोड़ा सा गंगा जल, कच्चा दूध, काले तिल और जौ मिलाएं।
अपने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें। शास्त्रों में कुशा के बिना तर्पण अधूरा माना गया है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं।
दोनों हथेलियों को जोड़कर पानी भरें और अंगूठे की तरफ से धीरे-धीरे बर्तन में पानी छोड़ें।
जल छोड़ते समय अपने पितरों का ध्यान करें।
तर्पण के बाद पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और सफेद मिठाई का भोग लगाएं, क्योंकि पीपल के पेड़ में देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी वास माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा भी रोचक है

फाल्गुन अमावस्या से जुड़ी कथा पुराणों में प्रचलित है, इस कथा के अनुसार एक बार ऋषि दुर्वासा इंद्र देव और अन्य देवताओं पर क्रोधित हो गए थे। इसके बाद उन्होंने भगवान इंद्र और अन्य देवताओं को श्राप दे दिया। ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण सभी देवता कमजोर हो गए और इसका फायदा उठाकर उन्होंने आक्रमण कर दिया और देवताओं के कमजोर होने के कारण युद्ध जीत लिया। दैत्यों से पराजित होने के बाद सभी देवता सहायता के लिए जगत के रचयिता भगवान श्रीहरि विष्णु के पास गए। उस समय श्रीहरि विष्णु ने सभी देवताओं की बात सुनी और उन्हें राक्षसों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने की सलाह दी। सभी देवताओं ने असुरों से बात की और उन्हें समुद्र मंथन के लिए मना लिया, अंततः असुर मान गये और देवताओं से संधि कर ली।
इसके बाद जब समुद्र से अमृत निकला तो इंद्र पुत्र जयन्त अमृत कलश हाथ में लेकर आकाश में उड़ गया। इसके बाद सभी राक्षस जयन्त का पीछा करने लगे और राक्षसों ने जयन्त से अमृत कलश छीन लिया। इससे फिर युद्ध शुरू हो गया और बारह दिनों तक देवताओं और दानवों में अमृत कलश पाने के लिए भयंकर युद्ध होता रहा। इस भीषण युद्ध के दौरान कलश से अमृत की कुछ बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में पृथ्वी पर गिरीं। इस समय चंद्रमा, सूर्य, बृहस्पति और शनि ने राक्षसों से अमृत कलश की रक्षा की। जब यह कलह बढ़ने लगी तो भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर राक्षसों का ध्यान भटकाया और देवताओं को छल से अमृत पिला दिया। तभी से अमावस्या तिथि पर इन स्थानों पर स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या पर इन बातों का विशेष ध्यान रखें

पंडितों के अनुसार इस दिन घर में पवित्रता बनाए रखें और मांस-मदिरा का सेवन न करें। किसी भी असहाय व्यक्ति या बुजुर्ग व्यक्ति का अपमान न करें। शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में अपने पूर्वजों के नाम का दीपक जलाएं।
-प्रज्ञा पांडे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!