धर्म

मकर संक्रांति 2026: कहीं पोंगल, कहीं बिहू, जानिए भारत में एक त्योहार के कई रंग और परंपराएं

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तर की ओर बढ़ने लगता है जो ठंड के कम होने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राशि के स्वामी थे। आमतौर पर पिता और पुत्रों में आपस में नहीं बनती इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का अवसर बनाते हैं। सर्दियों के मौसम की समाप्ति और फसल की शुरुआत का प्रतीक मकर संक्रांति त्योहार पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देश भर में पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग रात के अंधेरे में नदियों में स्नान करने लगते हैं। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालु इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम, वाराणसी में गंगा घाट, हरियाणा में कुरूक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी में स्नान करते हैं।

मकर संक्रांति का त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से भी मनाया जाता है। उत्तर और मध्य भारत में जहां इसे मकर संक्रांति कहा जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में इस त्योहार को केवल संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल कहा जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना पुण्य माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान करना विशेष फलदायी होता है. इस दिन देश के विभिन्न मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी समाप्त हो जाता है।

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इस दिन लोग पीले कपड़े पहनकर मंदिरों में जाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इस त्यौहार पर इलाहाबाद में लगने वाला माघ मेला और कोलकाता में गंगासागर के तट पर लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। अयोध्या में भी इस त्योहार की खूब धूम है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू में डुबकी लगाते हैं और राम मंदिर में रामलला, हनुमानगढ़ी में हनुमानलला और कनक भवन में मां जानकी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान हरिद्वार में मेले का भी आयोजन किया जाता है जिसमें भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है।

इस त्योहार का स्वाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूपों में देखने को मिलता है। जहाँ पूरे उत्तर प्रदेश में इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है और इस दिन खिचड़ी खाने और खिचड़ी दान करने का अत्यधिक महत्व है, वहीं महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रांति पर अन्य विवाहित महिलाओं को कपास, तेल, नमक आदि चीजें दान करती हैं। तमिलनाडु में यह त्यौहार पोंगल के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन कूड़ा जलाया जाता है, दूसरे दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिए स्नान करने के बाद खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल कहा जाता है। इसके बाद सभी लोग सूर्य देव को खीर का भोग लगाते हैं और प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू या भोगाली-बिहू के रूप में मनाया जाता है, जबकि राजस्थान में इस त्योहार पर विवाहित महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद लेती हैं।

माना जाता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति को ही चुना था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में मिली थीं।

– शुभा दुबे

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