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मंगल दोष उपाय: क्या मंगल दोष के कारण शादी में देरी हो रही है, जानिए ज्योतिष का सबसे सटीक उपाय

मंगल दोष उपाय: क्या मंगल दोष के कारण शादी में देरी हो रही है, जानिए ज्योतिष का सबसे सटीक उपाय
भारतीय समाज में जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसकी कुंडली बनाई जाती है। कई बार बच्चे के जन्म के समय ही उसकी कुंडली बनाई जाती है। कुछ लोग 5 वर्ष की आयु के बाद अपनी कुंडली बनवाते हैं। आपने कई लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि कुंडली में मंगल भारी है, जिसके कारण मांगलिक दोष हुआ है। शादी में भी देरी हो रही है. यदि बच्चे की कुंडली में मांगलिक दोष है तो माना जाता है कि उसके जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे।
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि मांगलिक दोष क्या है। क्या मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी होती है और क्या एक निश्चित समय के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसे में आज इस लेख के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मांगलिक दोष क्या है और इससे छुटकारा पाने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।

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जानिए मांगलिक का मतलब

मांगलिक शब्द सुनते ही लोग अक्सर इसे विवाह से जुड़ी किसी समस्या से जोड़ने लगते हैं। लेकिन इसका असली मतलब इससे भी कहीं बड़ा है. मंगल का अर्थ है शुभ अर्थात यह हर कार्य में शुभ फल देता है। कुंडली में मंगल ग्रह व्यक्ति के साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और इच्छा शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कुछ विशेष भावों में स्थित होता है। यदि यह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति मांगलिक होता है। ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष होता है।

मांगलिक दोष कब होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है, जो व्यक्ति के जीवन में दुर्भाग्य और चुनौतियां ला सकती है, खासकर वैवाहिक और व्यावसायिक जीवन में। इस दोष की पहचान तब होती है जब मंगल जन्म कुंडली के विशिष्ट घरों में स्थित होता है। हिंदू धर्म में मांगलिक दोष का सीधा संबंध विवाह से होता है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति मांगलिक दोष से पीड़ित माना जाता है।

मांगलिक दोष का जीवन में प्रभाव

ज्योतिष में मंगल को सेनापति माना जाता है। मंगल ग्रह को ऊर्जा, शक्ति और आत्मविश्वास का स्वामी माना जाता है। कई बार मंगल के कुछ अशुभ परिणाम देखने को मिलते हैं और नौ ग्रहों के चक्र में सूर्य के बाद मंगल को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। मंगल को लाल ग्रह भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आपकी कुंडली अशुभ या नीच राशि में है या अन्य ग्रहों के साथ अशुभ युति में है तो आपको जीवन में मांगलिक दोष के कुछ अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। कुंडली में मंगल दोष के कारण व्यक्ति का गुस्सा बढ़ सकता है और नौकरी और बिजनेस में नुकसान हो सकता है। यह दोष जीवन में छोटी-छोटी परेशानियों का कारण बन सकता है।
मांगलिक दोष के प्रभाव से व्यक्ति की परेशानियां बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे व्यक्ति को चल-अचल संपत्ति में हानि हो सकती है। यदि व्यक्ति के आत्मविश्वास में कमी है तो इसका कारण मांगलिक दोष भी हो सकता है।

उपचार

यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो व्रत करने से मंगल दोष से उत्पन्न दुर्भाग्य दूर हो सकता है। ऐसे में यदि आप मंगलवार का व्रत करते हैं तो आपको अपने जीवन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
मांगलिक दोष को दूर करने के लिए रोजाना सुबह और शाम हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगलवार के दिन लाल वस्त्र धारण करना चाहिए।

मांगलिक दोष किस उम्र में समाप्त होता है?

ऐसा माना जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार 28 वर्ष के बाद मंगल का प्रभाव कम माना जाता है। क्योंकि यह आयु का वह समय है जब मंगल की ऊर्जा स्थिर हो जाती है। जातक मानसिक रूप से परिपक्व होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष है और उसकी शादी 28 वर्ष की उम्र के बाद हो रही है तो मांगलिक दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। वहीं, अगर कुंडली में मंगल की महादशा या अंतर्दशा चल रही है तो उस दौरान भी इसका प्रभाव अधिक हो सकता है।

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